SAFIA SIDDIQUI

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लेखनी कहानी -17-Feb-2022

कविता

       बादल,



क्या देखा है तुमने बादलों को?,
सफेद रूई से बालों को?,कविता

       बादल,



क्या देखा है तुमने बादलों को?,
सफेद रूई से बालों को?,
और उनमें से गिरती नन्ही-नन्हीं बुन्दों को?,
जो धरती को भिगा जाती है,


जब चलती है हवा तो उड़ते हैं बादल भी,
पानी जो भाप बनकर उड़ जाता है,
बादल का आकार वहीं बनाता है,


अलग- अलग आकृति है बनाता,
बादल हर रूप में है आ जाता,
काली- काली घटाओं सा कभी उसका रंग हो जाता,
प्रकाश की किरणों से इन्द्रधनुशी रंग है बनाता,


छोटे- छोटे टुकड़ों में बादल जब है आता,
नन्हे-नन्हे मन को है भा जाता,
सूरज से है बादल का रिश्ता,
कभी छिपाता सूरज की किरणें,
कभी खुद सूरज से छिप जाता,


धरती से है गहरा नाता,
पानी बन के बरस है जाता,
कभी ऐसा बन जाता जैसे पहाड़ को खुद में समाता,
ऊदे बादल सुरमई बादल कभी कभी लाल भी हो जाता।



सफिया सिद्दीकी
और उनमें से गिरती नन्ही-नन्हीं बुन्दों को?,
जो धरती को भिगा जाती है,


जब चलती है हवा तो उड़ते हैं बादल भी,
पानी जो भाप बनकर उड़ जाता है,
बादल का आकार वहीं बनाता है,


अलग- अलग आकृति है बनाता,
बादल हर रूप में है आ जाता,
काली- काली घटाओं सा कभी उसका रंग हो जाता,
प्रकाश की किरणों से इन्द्रधनुशी रंग है बनाता,


छोटे- छोटे टुकड़ों में बादल जब है आता,
नन्हे-नन्हे मन को है भा जाता,
सूरज से है बादल का रिश्ता,
कभी छिपाता सूरज की किरणें,
कभी खुद सूरज से छिप जाता,


धरती से है गहरा नाता,
पानी बन के बरस है जाता,
कभी ऐसा बन जाता जैसे पहाड़ को खुद में समाता,
ऊदे बादल सुरमई बादल कभी कभी लाल भी हो जाता।



सफिया सिद्दीकी

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1 Comments

Seema Priyadarshini sahay

17-Feb-2022 05:36 PM

बहुत प्यारी रचना

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